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Mahabharatam महाभारतम

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महाभारत ज्ञान का सबसे बड़ा कोश  है, महाभारत महर्षि व्यास द्वारा प्रज्वलित ज्ञान प्रदीप है, यह धर्म का विश्वकोष है इस  ग्रंथ में जहां आत्मा की अमरता का संदेश गीता है वहां राजनीति के संबंध में कणिक  नीति, नारद नीति और विदुर नीति जैसे दिव्य उपदेश है जिसमें राजनीति के साथ साथ आचार और लोक व्यवहार का भी सुंदर निरूपण है सांस्कृतिक ऐतिहासिक धार्मिक राजनीतिक आदि अनेक दृष्टियों  से महाभारत एक गौरवमय  ग्रंथ है, इन्हीं गुणों के कारण इसे पांचवा वेद भी कहा जाता है, महाभारत इतना बड़ा ग्रंथ है कि साधन पाठक के लिए उसका पढना कठिन ही है स्वामी जी ने अत्यंत परिश्रम से यह संक्षिप्त संकलन तैयार किया है इसमें अश्लील असंभव गप्पों , असत्य और अनैतिहासिक घटनाओं को छोड़ दिया है, महाभारत का सार सर्वस्व इसमें दे दिया है, लोगों में ऐसी धारणा प्रचलित है कि जिस घर में महाभारत का पाठ होता है वहां गृह कलह लड़ाई झगड़ा आरंभ हो जाता है अतः घर में महाभारत नहीं पड़नी चाहिए यह धारणा सर्वथा मिथ्या  और भ्रांत  है, हमारा विश्वास है कि जहां महाभारत का पाठ होगा वहां के निवासियों के चरित्रों का उत्थान और मानव जीवन का कल्याण होगा हिचकिये नहीं महाभारत का पाठ कीजिए और इस की शिक्षाओं को अपने जीवन में धारण कीजिये ,इस संस्करण में असंभव अश्लील और अश्लील कथाओं  को निकाल दिया गया है लगभग 16000 श्लोकों  में संपूर्ण महाभारत पूर्ण  हुआ है श्लोकों का तारतम्य इस प्रकार मिलाया गया है कि कथा का संबंध निरंतर बना रहता है, यदि आप अपने प्राचीन गौरवमय  इतिहास की, संस्कृति और सभ्यता की, ज्ञान विज्ञान की, आचार व्यवहार की झांकी देखना चाहते हैं, यदि योगीराज कृष्ण की नीतिमतता देखना चाहते हैं, यदि प्राचीन समय की राजव्यवस्था की झलक देखना चाहते हैं, यदि आप जानना चाहते हैं कि द्रोपती का चीर खींचा गया था, क्या एकलव्य का अंगूठा काटा गया था, क्या युध्द के समय अभिमन्यु की अवस्था 16 वर्ष की थी,क्या कर्ण सूत पुत्र था, क्या  जयद्रथ को धोखे से मारा गया, क्या कोरवों की उत्पत्ति घड़ों से हुई थी? आदि

यदि आप भात्री प्रेम, नारी  का आदर्श  सदाचार, धर्म का स्वरूप, गृहस्थ का आदर्श, मोक्ष  का स्वरूप, वर्ण और आश्रमों के धर्म, प्राचीन राज्य का स्वरूप आदि के संबंध में जानना चाहते तो एक बार इस ग्रंथ को अवश्य पढ़ें

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The Mahabharata is the biggest cognition of knowledge, the knowledge enlightened by the Mahabharata Maharishi Vyas, it is the encyclopedia of religion. In this book where the message of the immortality of the soul is heard, there is divine instruction like granular policy, Narada policy, and Vidar policy regarding politics. There is a beautiful representation of politics as well as ethics and folk behavior, cultural historic religious political, etc. In many ways Mahabharata Because of these very qualities, it is also called the fifth Ved, Mahabharata is such a great treatise that it is difficult for the reader to read it. Swamiji has compiled this compilation with utmost diligence in it, inappropriate impossible speech, false And left unhistorical events, the essence of the Mahabharata has given in everything, there is a perception among people that in the house where Mahabharata is recited The house discord starts the fight, so that the Mahabharata should not fall into the house, this assumption is utterly false and delusional, we believe that the lessons of the Mahabharata will be the rise of the character of the inhabitants and the welfare of the human life will not hesitate, the lesson of Mahabharata Do this and keep the teachings of this in your life, in this version, impossible pornographic and obscene stories have been removed about 16000 verses In the entire Mahabharata is completed, the chapters of the verses have been mixed in such a way that the story remains constant, if you want to see the glory of your ancient glorious history, culture and civilization, knowledge science, style of conduct, if you Yogiraj wants to see the polity of Krishna, if you want to see the glimpses of the ancient times, if you want to know that the rift is done. Was that Eklavya’s thumb cut, whether Abhimanyu was 16 years old at the time of war, was Karna, the son of Yunta, did Jaudrath be deceived, did the chorvas originate from the mountains? e.t.c

If you want to know about love of love, women’s ideal ethics, nature of religion, model of householder, nature of salvation, character of caste and ashrams, nature of ancient kingdom etc. Once this book is read

Weight 2200 g
Dimensions 25 × 20 × 5 cm

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